उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने गठबंधन में अपनी दावेदारी पेश करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को करीब 200 विधानसभा सीटों की सूची सौंपी है। कांग्रेस की इस मांग से गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से सूची में शामिल सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की अंतिम मांग या सहमति की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने 200 सीटों पर क्यों ठोका दावा?
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने गोपनीय तरीके से अपनी सीटों की सूची सपा नेतृत्व तक पहुंचाई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के स्तर से यह सूची अखिलेश यादव को भेजी गई। इसमें उन विधानसभा क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई है, जहां कांग्रेस के सांसद हैं या पार्टी को अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठन की सक्रियता के आधार पर बेहतर संभावनाएं नजर आती हैं।
कांग्रेस ने इन सीटों पर अपनी दावेदारी के पीछे क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण और संगठन की स्थिति को आधार बनाया है। हालांकि, करीब 200 सीटों की सूची सौंपने का मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के अंतिम फैसले पर पहुंच गई है। सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच आगे बातचीत होने की संभावना है।
दिल्ली में हुई बैठक, प्रियंका गांधी भी रहीं मौजूद
सीट बंटवारे के मुद्दे पर कांग्रेस और सपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच दिल्ली में बैठक हुई थी। इस बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। बताया जा रहा है कि प्रदेश के नेताओं से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों को लेकर फीडबैक लिया गया था। इसी जानकारी के आधार पर कांग्रेस ने लगभग 200 सीटों की सूची तैयार कर सपा को भेजी।
अब दोनों दलों के सामने चुनौती यह है कि किस सीट पर कौन-सा उम्मीदवार मजबूत स्थिति में है और किन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगी को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाए। इसी आधार पर सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
कांग्रेस 125-130 सीटें चाहती है, सपा 40-50 पर अड़ी?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस गठबंधन में 125 से 130 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि सपा उसे केवल 40 से 50 सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है। दोनों दलों की इस संभावित मांग के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे सीटों के बंटवारे पर बातचीत लंबी खिंच सकती है।
सपा नेतृत्व का तर्क बताया जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। ऐसे में कांग्रेस को इतनी बड़ी संख्या में सीटें देना पार्टी के लिए उचित नहीं होगा। दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठन की सक्रियता के आधार पर अधिक सीटों की दावेदारी कर रही है।
403 सीटों में से 340-350 पर लड़ना चाहती है सपा
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। सूत्रों के अनुसार, सपा इस बार करीब 340 से 350 सीटों पर अपने चुनाव चिह्न के साथ उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने 347 सीटों पर अपने सिंबल से चुनाव लड़ा था, जबकि बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई थीं।
सपा नेतृत्व का मानना है कि अधिक सीटों पर अपने चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ने से पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति और जीत की संभावनाओं को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से कांग्रेस की बड़ी सीटों की मांग पर सहमति बनाना सपा के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
सपा ने कांग्रेस से मांगे संभावित उम्मीदवारों के नाम
सूत्रों के मुताबिक, सपा ने कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नाम भी मांगे हैं, जिन पर पार्टी अपनी दावेदारी पेश कर रही है। इससे सपा को यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि किन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पास मजबूत प्रत्याशी हैं और कहां सपा के पास बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
बताया जा रहा है कि सपा ने सीट बंटवारे की बातचीत पूरी होने से पहले कांग्रेस की दावेदारी वाली सीटों पर अपने आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं करने का फैसला किया है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे पर बनने वाली सहमति ही गठबंधन की आगे की रणनीति की दिशा तय कर सकती है।








