राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बुधवार, 26 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे राजनीतिक समय में हुई है, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार जयंत चौधरी पर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी और जयंत चौधरी की मुलाकात को सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।
जयंत चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और उन्हें कृषि तथा स्किल कंपटीशन्स जैसे मुद्दों पर मार्गदर्शन मिला। चौधरी के मुताबिक, पीएम मोदी ने नीतियों से जुड़े मामलों में क्रिएटिव थिंकिंग को बढ़ावा देने और गुड गवर्नेंस में जन भागीदारी के प्रभाव पर भी जोर दिया।
अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच क्यों बढ़ी सियासी तकरार?
जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच पिछले करीब दो सप्ताह से जुबानी जंग देखने को मिल रही है। इस विवाद की एक कड़ी उस समय सामने आई जब अखिलेश यादव ने फेसबुक पोस्ट के जरिए बीजेपी द्वारा अपने सहयोगियों को दी जाने वाली सीटों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने रालोद के लिए 73 सीट मिलने की बात कही थी।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच ‘चवन्नी’ को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा था, सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते, कोई बात नहीं थी. जाट समाज को टारगेट करना और कहना एबीसीडी हमने सिखाई? मैं इस अहंकार को देख चुका हूं करीब से और मानता हूं ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है.
जयंत चौधरी ने आगे राष्ट्रीय लोकदल को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। रालोद नेता ने कहा था, राष्ट्रीय लोकदल की सीटों की फिक्र है, अपनी नहीं. गुलाब जामुन, रसगुल्ले के कीमत की चिंता है, गन्ना किसानों की नहीं. गाड़ी के माइलेज पर दुखी हैं, भारत की ऊर्जा स्वाधीनता की परवाह नहीं.
2022 में साथ, 2024 में NDA का दामन
राष्ट्रीय लोकदल ने 2022 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी की पार्टी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का रुख कर लिया था।
एनडीए में शामिल होने से कुछ महीने पहले जयंत चौधरी के अखिलेश यादव का साथ छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस समय रालोद प्रमुख ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा था कि चवन्नी नहीं हूं जो पलट जाऊं. बाद में जब रालोद एनडीए का हिस्सा बन गया, तब से समाजवादी पार्टी की ओर से उनके इसी बयान को लेकर लगातार राजनीतिक तंज किए जाते रहे हैं।
ऐसे में अखिलेश यादव के लगातार हमलों के बीच जयंत चौधरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।









