दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ महारैली’ के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम काटे जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी निशाना साधा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में संभावित हार की वजह तैयार कर रहे हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि यह आंकड़ा चुनाव आयोग से लीक हुआ है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दिल्ली के रामलीला मैदान में आकर ‘किसी’ को हटाने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश के युवा भी बीजेपी को वोट देने के पक्ष में नहीं हैं।
‘हार के कारण को साबित करने के लिए आधार बना रहे योगी’
अखिलेश यादव ने कहा कि मतदाता सूची से नाम कटने का दावा सामान्य जानकारी नहीं हो सकता। उन्होंने इसे बीजेपी के हालिया चुनावी प्रदर्शन और एमएलसी चुनाव में पार्टी के पारंपरिक वोटों में आई कथित कमी से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
सपा प्रमुख ने कहा, ”एमएलसी चुनाव में जिस तरह से बीजेपी के परंपरागत वोट घटे हैं, ये उसी हिसाब-अनुपात से निकाला गया बड़ा आँकडा है. इसका मतलब उन्होंने मान लिया है कि उनके लगभग 1.27 करोड़ वोट घटनेवाले हैं, इसीलिए पहले से हार के कारण को साबित करने के लिए आधार बना रहे हैं. ये कोई सामान्य जानकारी नहीं है, जो उन्हें सड़क चलते मिल गई है.”
‘सीएम योगी ने लड़ने से पहले ही हथियार डाल दिया’
सपा अध्यक्ष ने 1.27 करोड़ वोटों के आंकड़े का गणितीय आधार पर जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के हिसाब से प्रत्येक सीट पर बीजेपी को औसतन करीब 31,514 वोटों का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने कहा, ”सामान्य अंकगणित के हिसाब से इसका अर्थ ये निकलता है कि यूपी में विधानसभा की हर सीट पर भाजपा को लगभग 12700000/403=31514 वोटों का नुकसान होने जा रहा है. मतलब मुख्यमंत्री जी ने लड़ने से पहले ही हथियार भी डाल दिया है और दिल्ली की अपनी ही सरकार पर आरोप भी लगा दिया है. जिससे हार की ज़िम्मेदारी ख़ुद उन पर न आए.”
INDIA गठबंधन की रैली से ठीक पहले क्यों सामने आया यह आंकड़ा?
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘वोट बचाओ-देश बचाओ महारैली’ से ठीक एक दिन पहले यह दावा क्यों किया। उन्होंने इस समय को लेकर संदेह जताया और एमएलसी चुनाव में बीजेपी को मिली हार का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ”यूपी के जिज्ञासु मतदाता पूछ रहे हैं कि ये आँकड़ा एमएलसी चुनाव हारने के तुरंत बाद ही क्यों आया या फिर किसी के यूपी में आगमन के तुरंत बाद क्यों दिया गया, कहीं ऐसा तो नहीं कि ‘इनकी’ भी बदली की पर्ची पकड़ा कर कोई वापस लौट गया है.”
सपा प्रमुख की इन टिप्पणियों के जरिए बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच कथित आंकड़ों के स्रोत तथा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
55 लाख लाभार्थियों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने उन 55 लाख लाभार्थियों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने के दावे पर भी सवाल उठाए, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान में किया गया था। उन्होंने पूछा कि यदि इन लोगों के नाम सूची से गायब हैं, तो उनके नाम पर मिलने वाली सरकारी सहायता का लाभ किसे मिल रहा था।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह मामला कथित तौर पर बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने बीजेपी की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है, तो इस मामले में दोनों सरकारों की जवाबदेही बनती है। हालांकि, लाभार्थियों के नाम और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक दावे हैं।
यूपी चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बीजेपी की रणनीति पर सियासी घमासान
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची, वोटों में संभावित कमी और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार की चुनावी रणनीति और जवाबदेही को निशाने पर लिया। अब इस मुद्दे पर बीजेपी और चुनाव आयोग की ओर से आने वाली प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।








