जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए NEET पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड कमिटी का शिकायत पोर्टल 13 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखने की भी व्यवस्था की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कमिटी की पहली रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक उसे बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से अपील की कि वे प्रदर्शन के दौरान प्रभावित हुए लोगों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि मामले की जांच के लिए कमिटी को पर्याप्त जानकारी मिल सके।
पीड़ित कमिटी के सामने रख सकते हैं अपनी शिकायत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई या कथित अधिक बल प्रयोग को लेकर शिकायत है, वे हाई पावर्ड कमिटी के पोर्टल पर अपनी बात रख सकते हैं। शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान भी किया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी कमिटी के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति दी है। साथ ही उनसे कहा गया है कि वे प्रभावित लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित करें, जिससे कमिटी सभी संबंधित पक्षों की बातें सुनकर निष्पक्ष तरीके से जांच कर सके।
2 दिसंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई के दौरान कमिटी को प्राप्त शिकायतों और जांच की प्रगति पर ध्यान दिया जाएगा। NEET पेपर लीक के मुद्दे पर जून-जुलाई में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया था।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। इसके अलावा CJP ने NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और मामले में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों को सजा दिलाने की मांग भी उठाई थी।







