प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के नागपुर में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी के नागपुर कार्यालय ने प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के मालिक शशांक गोविंद प्रसाद पांडे से जुड़े दो ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 1.95 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई, जबकि बैंक खातों में जमा 40 लाख रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कर दी गई। ED को छापेमारी में आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं। इसके अलावा करोड़ों रुपये की कई अचल संपत्तियों का पता चला है, जिन्हें कथित तौर पर अपराध से अर्जित कमाई से खरीदे जाने का संदेह है।
धोखाधड़ी के मामलों में ED की जांच, FIR के आधार पर कार्रवाई
ED ने यह जांच नागपुर के अजनी पुलिस स्टेशन और राणाप्रतापनगर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 418 और 420 के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, शशांक पांडे पर कई लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी कर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।
जांच में सामने आए एक मामले में एक बुजुर्ग विधवा महिला ने अपनी जमीन के विकास के लिए शशांक पांडे के साथ समझौता किया था। इस एग्रीमेंट के तहत बिल्डर को महिला को 1.75 करोड़ रुपये देने और उसके नाम पर 14 रिहायशी फ्लैट आवंटित करने थे।
बुजुर्ग विधवा महिला से ₹9.40 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
ED की जांच के मुताबिक, महिला के नाम पर 14 फ्लैट आवंटित करने के लिए डिक्लेरेशन-कम-करेक्शन डीड भी तैयार की गई थी। हालांकि, आरोप है कि शशांक पांडे ने महिला की जानकारी और सहमति के बिना कथित तौर पर धोखाधड़ी से इस दस्तावेज को रद्द कर दिया।
इसके बाद महिला के लिए निर्धारित फ्लैट तीसरे पक्ष को बेच दिए गए। इन फ्लैटों की बिक्री से प्राप्त 8.93 करोड़ रुपये का कथित तौर पर निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, समझौते के तहत महिला को मिलने वाले 45 लाख रुपये भी नहीं दिए गए। इस तरह महिला को कुल 9.40 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
22 फ्लैट गिरवी रखकर बेचने का भी आरोप
ED की जांच में नागपुर के दिव्या प्रयाग अपार्टमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित अनियमितताएं भी सामने आई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस परियोजना के 22 फ्लैट दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) के पास 22 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लोन के बदले गिरवी रखे गए थे। इनमें से 11 करोड़ रुपये का ऋण जारी भी किया गया था।
आरोप है कि शशांक पांडे ने बैंक से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लिए बिना और फ्लैट गिरवी होने की जानकारी खरीदारों को दिए बिना उन्हें बेच दिया। इसके साथ ही, होम लोन से जुड़े मामले में बैंक को कथित तौर पर गलत हलफनामा दिया गया, जिसमें पहले से मौजूद मॉर्गेज की जानकारी छिपाई गई थी।
₹12.84 करोड़ का बकाया, SARFAESI Act के तहत कार्रवाई
इस मामले में बाद में 12.84 करोड़ रुपये का बकाया सामने आया और SARFAESI Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई। ED को संदेह है कि फ्लैटों के गिरवी होने की जानकारी छिपाकर उनकी बिक्री किए जाने से खरीदारों को आर्थिक नुकसान हुआ और आरोपी को अनुचित आर्थिक लाभ मिला।
फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय मामले की आगे जांच कर रहा है। छापेमारी में मिली नकदी, फ्रीज की गई बैंक जमा राशि, दस्तावेजों और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।








